रवि योग हस्त नक्षत्र में नाग पंचमी पर शिव संग होगी नाग पूजा

भोपाल। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा के साथ उनके गले में हार की तरह सुशोधित नाग देवता की पूजा का भी अत्यंत महत्व है। श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी विधि को नाग पंचमी का महापर्व मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा का ना सिर्फ धार्मिक बल्कि ज्योतिषीय महत्व है। नाग पंचमी के दिन शिव भक्त तमाम तरह की मंगल कामनाओं के साथ कुंडली से जुड़े कालसर्प दोष को दूर करने के लिए विधि विधान से कालसर्प पूजन और लोगों का दर्शन करते हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित सतीश सोनी के अनुसार इस साल नाग पंचमी तिथि 12 अगस्त 2021 को दोपहर 3/2477 होकर 13 अगस्त 2021 को दोपहर 1. 42 तक रहेगी। इस दौरान 13 अगस्त की सुबह 5:49 से 8:28 तक कर पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। जिसको अवधि 2 घंटा 39 मिनट है। जो कि नागपंचमी का श्रेष्ठ व शुभ मुहूर्त रहेगा। इस दिन हस्त नक्षत्र और रवि योग कहते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार सावन महीने की शुक्ल बालाजी धाम में होगा नाग पक्ष पंचमी को भगवान श्री कृष्ण ने वृंदावन में कालिया नाग को हराकर लोगों को नया जीवन दिया था। श्री कृष्ण भगवान ने कालिया सांप के फन पर नृत्य किया इसके बाद वह नया कहलाए, तभी से यह परंपरा चली आ रही है। नाग पंचमी पर क्या करें नाग पंचमी पर्व पर जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष, पित्र दोष, चांडाल दोष, ग्रहण दोष, मंगल दोष होता है। वह जातक इस दिन इन दोषों का निराकरण करा कर कालसर्प दोष से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। इस दिन कालसर्प शांति के अलावा राहु-केतु के साथ जाप, दान, हवन भी उपयुक्त माना जाता है। वहीं अन्य हों के लिए महामृत्युंजय का जाप शिव सहस्त्रनाम का पाठ, गाय और बकरी का दान का विधान शास्त्रों में बताया गया है। वहीं गरुड़ पुराण के अनुसार इस दिन व्रत रखने वाले को मिट्टी या आटे के नाग बनाकर उन्हें फूल खो दीप से पूजनाए पूजा के बाद चुने हुए चने और का प्रसाद बांटना चाहिए। पंचमी अमृत महोत्सव मंदिर में नागपंचमी पर्व पर अमृत महोत्सव पर तीन दिवसीय कालसर्प निर महाराज का आयोजन होगा। सुबह 9:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक चलेगा। अंगारक योग के साथ शिव महा तिज देश के प्रति से के वैदिक विद्वानों द्वारा की जाएगी। पूजा में बैठने के लिए जातकों के कर दिए गए हैं। इस पूजा में ऐसे जो बीपीएल कार्ड धारक होंगे। उन्हें समिति द्वारा पूजन सामग्री में विशेष होने के कारण राहु-केतु के दोष से उत्पन्न कालसर्प दोष दूर करने का सबसे सर्वोत्तम यह दिन होगा। इसके साथ ही इस दिन कलिक जयतो भी मनाई जाएगी। क्या है नाग पंचमी का महत्व पुराण के अनुसार सावन महीने की पंचमी नाव देवताओं को समर्पित है।

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